बाड़मेर के कुबड़िया गांव की सरपंच सुशीला है जातिगत दुर्भावना से परेशान, गांव के दबंगों सहित विधायक अमीन खान पंचायत का कार्य नहीं करने देते

कुबड़िया सरपंच सुशिला ने पहले भी कलेक्टर को पत्र देकर आत्मदाह की धमकी दी थी, और ग्राम पंचायत का मुख्यालय बदलने को लेकर बाड़मेर जिले मे ग्रामीणो के धरने को 80 दिन हो गए हैं लेकिन राजस्थान सरकार व प्रशासन अभी तक मौन है।

जानिए क्या है मामला

बाड़मेर.भारत-पाक सीमा से सटे सरहदी बाड़मेर (Barmer) जिले के गडरारोड उपखण्ड क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुबड़िया की सरपंच सुशीला ने जातिगत दुर्भावना से परेशान हैं, इस मामले में परेशान होकर सरपंच ने पहले भी जिला कलेक्टर (Collector) को पत्र लिखकर कलेक्ट्रेट के सामने आत्मदाह करने की धमकी दी थी. लेकिन इस मामले से संबंधित आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।


बाड़मेर जिला कलेक्टर को लिखे अपने पत्र में साफ किया था कि उसके ग्राम पंचायत के विकास के बीच में स्थानीय विधायक अमीन खान और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और कुछ प्रभावशाली लोग आड़े आ रहे हैं. सरपंच ने आरोप लगाए हैं कि गांव में विकास कार्य रुके हुए हैं. ग्राम पंचायत के ग्रामीणों के हितों के साथ कुठाराघात किया जा रहा है. ग्रामीणों के कार्यों के नहीं होने के चलते उसने यह कड़ा कदम उठाने के लिए सोचा है.

दलित सरपंच सुशीला ने जिला कलेक्टर को सौपे पत्र में यह भी लिखा था कि उसकी ही ग्राम पंचायत में प्रभावशाली लोगों द्वारा उप सरपंच की उपस्थिति में ही एक दिन में 4 प्रस्ताव फर्जी तरीके से पास करवा दिए हैं. ग्राम पंचायत की मीटिंग में न तो उसको कोई सूचना दी जाती है और न ही उसके ग्राम पंचायत में विकास कार्य करवाए जाते हैं. उन्होंने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उसके साथ हो रहे सवैधानिक अधिकारों का हनन रोकने की मांग की थी. साथ ही पत्र में लिखा गया था कि यदि समय पर सुनवाई नहीं हुई तो उसे मजबूरन जौहर करना पड़ेगा. 

बता दें कि इन फर्जी प्रस्तावों में ग्राम पंचायत की ओर से फर्जी पट्टे जारी किए गए हैं.