किसान आंदोलन: Kisan Ekta Morcha - 60 लोगों ने संभाल रखी है IT सेल की कमान

किसान आंदोलन: Kisan Ekta Morcha - 60 लोगों ने संभाल रखी है IT सेल की कमान

Kisan Ekta Morcha



हालांकि, इस सेल के पास कोई 'वॉर रूम' नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसके अधिकतर सदस्य घर से काम कर रहे हैं, जबकि कुछ आंदोलनस्थल से काम कर रहे हैं।

दिल्ली में किसान आंदोलन के बीच सिंघु बॉर्डर पर एक आईटी सेल बनाया गया है। प्रदर्शन में शामिल करीब 60 लोगों के पास ही इसकी कमान है। यह 24 घंटे एक्टिव रहता है और इसमें 25 ऑनलाइन, जबकि 35 ऑफलाइन वॉलंटियर्स हैं। ये लोग आंदोलन को लेकर फैलाई जाने वाली अफवाहों और फर्जी खबरों से ही निपटने के साथ ऑनलाइन डिस्कशंस की निगरानी भी करते हैं। सेल ने Kisan Ekta Morcha नाम से टि्वटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और यूट्यूब पर अपने हैंडल और अकाउंट बनाएं हैं, जो बनाए जाने के तीन दिनों के भीतर लाखों लोगों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं।


सेल संभालने वालों का कहना है कि इसे किसान आंदोलन को लेकर ऑनलाइन फैलाई जा रही गलत जानकारियों से निपटने के लिए बनाया गया है। सेल के अध्यक्ष 30 वर्षीय बलजीत सिंह हैं। उन्होंने बताया- कई वरिष्ठ किसान नेता चर्चा कर रहे थे और हम इस नतीजे पर आए कि हमें इंटरनेट पर फैल रही गलत सूचनाओं का मुकाबला करना होगा। हमारे आंदोलन और छवि को बिगाड़ने का प्रयास किए गए हैं।

सिंह ने बताया, “फेक न्यूज पहले के मुकाबले तेजी से फैल रही है। हाल में विदेश के खालिस्तानी पोस्टर्स को फोटोशॉप (एडिट कर के) किया गया और ऐसे दिखाया गया, जैसे वे हमारे आंदोलन में यूज हुए हों। अभी, हमने एक झूठ को बेकनकाब करने वाला स्पष्टीकरण भी जारी किया है। ऐसा बहुत जरूरी है, क्योंकि इस तरह की पोस्ट्स की रीच (पहुंच) अधिक है और वे हमें आंदोलन को भटका सकते हैं।”

बकौल सिंह, “ऑफलाइन वॉलंटियर्स का काम होता है- दिन के भाषणों को रिकॉर्ड करना। सुबह आठ बजे दिन का एजेंडा तय होता है, जिसमें किस चीज पर भाषण होगा? यह तय होता है। जमीन में एक्टिव वॉलंटियर्स तकनीक से जुड़ा काम भी देखते हैं, जो कि इवेंट की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के पीछे होता है। सेल के सदस्यों ने किराए पर एक लीज लाइन भी ली हुई है, ताकि हमें बेहतर इंटरनेट की सुविधा मिल सके।”

सिंह का दावा है- सभी वॉलंटियर्स को एक भी रुपया नहीं मिलता है। हम यह सब इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि हम भी किसान हैं और हम इस आंदोलन को अफवाहों व गलत जानकारी के आधार पर कमजोर नहीं होने दे सकते।

आईटी सेल तीन दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लॉन्च किया गया था और उस दौरान सीनियर किसान नेता भी मौजूद थे। भारतीय किसान यूनियन (डोआबा) के मंजीत सिंह ने कहा था- इसे लाकर हमने भी दिखा दिया है कि हम भी डिजिटल हैं। बलजीत सिंह और अन्य युवा सरकार की बनाई आईटी विंग्स को टक्कर देंगे। हम हमारे आंदोलन में सहायक होगा।

हालांकि, इस सेल के पास कोई ‘वॉर रूम’ नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसके अधिकतर सदस्य घर से काम कर रहे हैं, जबकि कुछ आंदोलनस्थल से काम कर रहे हैं। सिंह और उनके दो अन्य साथियों के पास दो लैपटॉप हैं, जिन्हें इस्तेमाल कर वे अपना काम करते हैं। अधिकतर वॉलंटियर मूलरूप से पंजाब के हैं, जबकि कुछ दिल्ली से ताल्लुक रखते हैं।

सेल के सदस्य अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स चलाते हैं, जहां वे आंदोलन में जो कुछ पूरे दिन में होता है, उसका अपडेट देते हैं। ये अपडेट्स जिन तस्वीरों या रूप में होते हैं, उनमें पोस्टर और लोगो भी होते हैं। वे इसके अलावा उन विवादित वीडियो और पोस्ट का सामना करने पर चर्चा करते हैं, जो उनके आंदोलन की छवि खराब करना चाहते हैं।