पुलिस अभिरक्षा में मौत को लेकर मेड़ता थाने पर गिरी गाज, पूरा थाना लाइन हाजिर ! हनुमान बेनीवाल ने लिखा था मुख्यमंत्री को पत्र

पुलिस अभिरक्षा में मौत को लेकर मेड़ता थाने पर गिरी गाज, पूरा थाना लाइन हाजिर ! हनुमान बेनीवाल ने लिखा था मुख्यमंत्री को पत्र


मेड़ता सिटी (नागौर). शांतिभंग करने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति घेवरराम की पुलिस अभिरक्षा में मौत के मामले में आखिरकार मेड़ता पुलिस थाने पर गुरुवार शाम को गाज गिर गई। जिला पुलिस अधीक्षक श्वेता धनखड़ ने थाने के सभी स्टाफ को लाइन हाजिर करने के आदेश दिए।


गौरतलब है कि मेड़ता थाना पुलिस ने मंगलवार को शांति व्यवस्था करने के आरोप में सोगावास निवासी घेवरराम सहित दो अन्य को गिरफ्तार किया था। घेवरराम की पुलिस कस्टडी में तबीयत बिगडऩे से बुधवार तडक़े मौत हो गई थी, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक श्वेता धनखड़ ने न्यायिक जांच के चलते मानवाधिकार आयोग के आदेश पर पूरे थाने को लाइन हाजिर किया गया। इससे पूर्व गुरुवार शाम नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी सहित पूरे थाना स्टाफ को हटाए जाने की मांग की थी। सांसद ने सोगावास निवासी घेवरराम जाट की पुलिस कस्टडी में हुई मौत को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व डीजीपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। देर शाम एसपी ने थाने के स्टाफ को लाइन हाजिर करने के बाद पुलिस निरीक्षक सतीश मीणा को थानाधिकरी, एसआई सुमन को द्वितीय अधिकारी तथा एक सहायक उप निरीक्षक, 5 हैड कांस्टेबल, 4 महिला कांस्टेबल, 13 कांस्टेबल सहित 25 पदों पर नियुक्तियां की।

मेड़ता डीएसपी सहित पूरे थाना स्टाफ को हटाने की मांग कार्रवाई से पूर्व सांसद बेनीवाल ने गुरुवार शाम पांच बजे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व डीजीपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। सांसद ने आरोप लगाया कि घेवरराम की पुलिस प्रताडऩा के कारण हिरासत में हुई मृत्यु अत्यंत दु:खद प्रकरण है। शांतिभंग की धारा में गिरफ्तार किए व्यक्ति की पुलिस हिरासत में पुलिस द्वारा की गई मारपीट से हुई मृत्यु होना सिस्टम व पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया है तथा जनप्रतिनिधियों व परिजनों को सच्चाई से अनभिज्ञ रखा गया। सांसद ने मुख्यमंत्री व डीजीपी को इस मामले में संज्ञान लेते हुए मेड़ता क्षेत्र के सीओ व पूरे थाने को एपीओ करने व दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही करने तथा हिरासत में हुई मौत के मामले की धारा 302 में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करते हुए मृतक के परिजनों को आर्थिक पैकेज देने की मांग की है।