अगर रालोपा को एक ऊंचाई तक पहुंचना है तो इन बातो पर ध्यान रखना होगा

रालोपा पार्टी को सबसे पहले इन कमीयो को भरना होगा

1. हनुमान बेनीवाल के सामने विचारधारा, विजन, संगठन निर्माण और टीम की चुनौती है. किसी भी राजनैतिक दल की अपनी एक विचारधारा होती है, जिसके बलबूते वह दुनिया को या लोगों को यह बताता है कि यह हमारी विचारधारा है और हम इसलिए बीजेपी-कांग्रेस से अलग हैं. अब तक हनुमान बेनीवाल और उनकी टीम उस विचारधारा का निर्माण नहीं कर पाए हैं, जिससे की जनता में साफ-साफ संदेश जाए की रालोपा की विचारधारा क्या है ? सभी राजनैतिक दल इतिहास से प्ररेणा लेते हैं और अपने पोस्टरों और नारों में महापुरूषों को जगह देते हैं और लोगों को बताते हैं कि हम इन महापुरूषों के सपनों का देश और समाज बनाना चाहते हैं, लेकिन हनुमान बेनीवाल की पार्टी रालोपा के पोस्टरों पर अब तक इतिहास के महापुरूष गायब हैं, जिन पर की वह चलना चाहती हैं ? कुलमिलाकर रालोपा की विचारधारा अब तक साफ़ नहीं है, ऐसी परिस्तिथियों में जनता में कन्फयूजन और दुविधा बढ़ती है और वे मन बनाते हैं, लेकिन अंत में कहीं और सेट हो जाते हैं. 

2. हनुमान बेनीवाल के पास विजन की कमी है, वे जीवन में क्या करना चाहते हैं, राजनीति में वे अपने आप को कहां देखते हैं और उनका रोडमैप क्या है ? वे अपने समर्थकों तक अपना विजन नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे की जनता और समर्थक भविष्य को देख कर उनसे जुड़ें. 

3. रालोपा संगठन निर्माण के मामले में अभी एकदम जीरो है, यह वक्त की कमी की वजह से भी हो सकता है, लेकिन सिर्फ़ जयपुर से और कुछ चंद लोगों के भरोसे कोई राजनैतिक दल नहीं चलता. राज्य से लेकर गांव स्तर तक हर राजनैतिक दल का संगठन ही उसे कामयाब बनता है, रालोपा को सब काम छोड़कर तुरंत प्रभाव से संगठन निर्माण का काम करना चाहिए. जिससे की लोकसभा, पंचायत और नगरपालिका चुनावों की तैयारी अभी से की जा सकें, 

4. हनुमान बेनीवाल की कोर टीम अभी बेहद छोटी और उसमें विविधता की कमी है. बेनीवाल को अपनी कोट टीम को बड़ा करना चाहिए, भरोसेमंद लोगों को अपने साथ लेकर लोकतांत्रिक तरीके से पार्टी का हर फैसला करना चाहिए, जिससे की नीचे तक यह संदेश जाए की रालोपा सच में लोकतांत्रिक पार्टी है. रालोपा की कोर टीम में समाज के सभी तबकों से लोगों को जगह मिलनी चाहिए. बुजुर्गों के अनुभव और युवाओं के जोश का संतुलन होना चाहिए. प्रदेश भर के नए टैलेंट को कोर टीम में शामिल करके उन्हें नई जिम्मेदारीयां देनी चाहिए. 

5. बेनीवाल को बीजेपी-कांग्रेस के बाहर के राजनैतिक दलों को एकजुट करने का काम तुरंत प्रभाव से करना चाहिए क्योंकि जब देश में बीजेपी और कांग्रेस जैसी पार्टियां बिना गठबंधन के नहीं चल सकती तो फिर रालोपा को भी राजस्थान में समान विचारधारा वाले लोगों को एकजुट करना चाहिए, जिससे कि बीजेपी-कांग्रेस के बाहर के वोट बैंक को एकजुट किया जा सकें और सत्ता तक पहुंचा जा सकें. 

Political Tak का लक्ष्य क्षेत्रीय पार्टीयो को एक नई उच्चाई देना